नीतीश तो फिर CM बन गए, अब तेजस्वी का क्या होगा!

बिहार के उप-मुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद इस्तीफा नहीं दिया, तो खुद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे के महज 16 घंटों के भीतर ही नीतीश फिर अपनी कुर्सी पर सवार हो गए, लेकिन मुश्किलें तेजस्वी की बढ़ गईं.

उप-मुख्यमंत्री रहते हुए भले CBI ने रेल रत्न होटल आवंटन घोटाले में तेजस्वी से पूछताछ नहीं की, लेकिन अब CBI कभी भी उनके घर या दफ्तर का दरवाजा खटखटा सकती है. इसके अलावा बेनामी संपत्ति के मामले में आयकर विभाग पहले ही उनके पीछे पड़ा है, जिसमें और तेजी आने की संभावना है. आयकर विभाग ने तेजस्वी की संपत्तियों की पहचान कर रखी है. इससे आगे बढ़ते हुए विभाग इन बेनामी संपत्तियों को जब्त करने के लिए उन पर नोटिस चिपका सकती है. साथ ही, तेजस्वी की बड़ी बहन मीसा और उनके पति शैलेश पर प्रवर्तन निदेशायल शिकंजा कस सकता है.

सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक राकेश अस्थाना के मुताबिक लालू ने रेलमंत्री रहने के दौरान 2004 से 2009 के बीच दो होटलों की देखभाल के लिए जिस प्राइवेट कंपनी को टेंडर दिया था, उसने लालू को टेंडर के एवज में तीन एकड़ जमीन दी. इसमें लालू और तेजस्वी के साथ कुछ अन्य लोगों पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन ऐक्ट, 1988 के तहत केस दर्ज किया गया है.

बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि तत्कालीन डिप्टी सीएम तेजस्वी और उनके भाई तेजप्रताप के पास एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की बेनामी संपत्तियां हैं. इसके अलावा करोड़ों रुपए के गिफ्ट के लेन-देन के आरोप भी हवा में उछलते रहे. तेजस्वी और तेजप्रताप को चाचा और नाना से मिले उपहारों की कीमत भी करोड़ों में बताई गई, जिसकी जांच चल रही है. लालू की बेटी हेमा यादव और पत्नी राबड़ी देवी को उनके नौकर ललन चौधरी ने 2014 में करीब एक करोड़ रुपए की जमीन दान में दी थी. ललन के नाम से बीपीएल कार्ड भी बना हुआ है. ये भी जांच के दायरे में है.